मार्मिक कथा… 3 जून छत भी छीन कर ले गया

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पुष्पराज धीमान
पथरी।
इसे बदनसीबी ना कहें तो फिर क्या कहें तीन साल पहले मां बाप का साया जाने के बाद 3 जून बृहस्पतिवार को अनाथ हुए बच्चों से सर छुपाने की छत भी छीन कर ले गया। गनीमत यह रही की बच्चे मकान गिरने से पहले धनपुरा में अपने फूफा विजय पुत्र दाल सिंह के यहां आ गए थे। पथरी क्षेत्र के भट्टीपुर गांव में मकान गिरने की घटना से भले ही अनाथ बच्चे बच गए। लेकिन इस मकान की जद में जो स्कूटी विकलांग दिलीप की आवागमन का साधन हुआ करती थी को भी नहीं बख्शा। करीब 4 साल पहले 35 वर्षीय मजदूर राकेश पुत्र केवल की एक घटना में मौत हो गई थी 6 महीने भी नहीं बीते की राकेश की पत्नी जैनवती भी यह दुनिया छोड गई और छोड गई तीन लाडली सबसे बड$ी 12 वर्षीय पुत्री पायल 10 वर्षीय स्वाति और 8 वर्षीय आराधना के ऊपर मुसीबत का एेसा पहाड टूटा। वह ना कमाने लायक और ना ही घर में कुछ बेचने लायक था। अगर घर में कुछ था तो वह थी इन अनाथ बच्चों की दादी किशन देवी लेकिन किशन देवी का भी बूढ$ा शरीर थोड$े दिनों में ही जवाब दे गया और वह स्वर्ग सिधार गई। घर में पालन पोषण करने वाला कोई ना रहता देख इनके संरक्षण की जिम्मेदारी उठाते आ रहे विजय परसों ही उन्हें धनपुरा से बारिश के बाद साफ सफाई करने हेतु भटटीपुर लाया और सुबह ही वापस धनपुरा भी ले आया। लेकिन बदकिस्मती ने उनका पीछा नहीं छोड$ा और उन पर उनका घर गिरने की खबर पहुंच गई। घर में जो समान था वह भी क्षतिग्रस्त हो गया। पड$ोसी दिलीप कुमार उन बच्चियो के घर को खाली देख कर अपनी स्कूटी खड$ी कर रहा था। कल यह स्कूटी कबाड$े में तब्दील हो जाएगी घर गिरने की खबर से आहट केवल वह ही नहीं बल्कि पूरा गांव आहत हो गया। परिवार को सरकार की आेर से कुछ राहत और मकान की सुविधा मिल जाए यह सोच कर राजस्व विभाग को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर आए लेखपाल सुनीति पाल ने बताया की मामले की जांच कर रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों भेजी जाएगी। बरहाल तीनों बच्चियों को उनका फूफा धनपुरा अपने घर ले आया है।

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