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पेयजल निगम और जल संस्थान के एकीकरण की मांग की

हरिद्वार।
उत्तराखंड पेयजल निगम अधिकारी एवं कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के जनपद अध्यक्ष मिशम ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उत्तराखंड पेयजल निगम का राजकीयकरण करने की मांग की है। पत्र में कहा कि राज्य हित में यह उचित होगा कि जल संस्थान का राष्ट्रीयकरण करते हुए एकीकृत पेयजल विभाग का गठन किया जाए। एकीकरण होने का सबसे अधिक लाभ राज्य की जनता को होगा। पेयजल समस्या के समाधान हेतु एकल उत्तरदायित्व विभाग के होने से पेयजल योजनाआें की उपादेयता बढ$ेगी तथा अनावश्यक दौरे के अलावा निर्माण की समस्या समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि पेयजल निगम व जल संस्थान के एकीकरण में राजकीयकरण होने से अधिष्ठान व्यय में कटौती होगी। जो उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में अत्यंत आवश्यक है। मिशम ने कहा कि जल जीवन मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में वर्तमान तक विशेष प्रगति नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण पेयजल व्यवस्था हेतु राज्य में सामंजस्य का ना होना है। उन्होंने कहा कि पेयजल निगम के कार्मिकों पेंशनरों को वर्तमान तक मांग मई-जून में जुलाई 2२1 के वेतन पेंशन की धनराशि शासन द्वारा निर्गत नहीं की गई है। वेतन पेंशन आरक्षण समय पर ना होने के कारण वर्तमान में महामारी के बीच युद्ध स्तर पर कार्य कर रहे कार्मिकों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड$ रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उक्त मांग पूर्ण होने की स्थिति में समन्वय समिति की केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा लिए गए निर्णय के क्रम में आंदोलन किया जाना समिति की बाध्यता होगी।

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