एक-दो नहीं, पूरे एक सौ करोड़ कि इनकम टैक्स चोरी की रेड के महाकुंभ घोटाले से भी जुड़े हो सकते हैं तार

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फ़रवरी माह में पटना से रांची पहुंच बिहार-झारखंड की संयुक्त टीम के 50 आयकर अफसरों की टीम ने एक साथ नामी ठेकेदार व उनके करीबियों के घरों, ऑफिस, स्कूलों और कॉलेज समेत 9 ठिकानों पर मारा था छापा, नामी ठेकेदार व राजनेता भाई पर आय छुपाने का मामला सामने आया था, विभाग को बेनामी संपत्तियां और लेनदेन सम्बन्धित कई दस्तावेज हाथ लगे थे । जिसकी कड़ियों कि जांच अधिकारियों द्वारा अभी भी कि जा रही है । सूत्रों के अनुसार नामी ठेकेदार के करीबी रिश्तेदारी से जुड़े हो सकते हैं उत्तराखंड के भी तार ।

नामी ठेकेदार की कंस्ट्रक्शन कंपनी, पब्लिक स्कूलों, और कॉलेज के आय-व्यय में छह साल में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी छिपाई पाई गई थी।

छापेमारी के दौरान आयकर विभाग को लाखों रुपये नकद व आय-व्यय से संबंधित दस्तावेज जब्त किए थे । आयकर विभाग द्वारा ठेकेदार के करीबी रहे सभी रिश्तेदारों की भी जांच चल रही है । सूत्रों की माने तो विभाग को कई जगहों पर बेनामी सम्पत्तियों की खरीद फरोख्त के दस्तावेज भी हाथ लगे थे । इनकम टैक्स की टीम को छानबीन में ये भी पता चला था कि ठेकेदार ने आय की तुलना में आयकर रिटर्न में फर्जी खर्च दिखाया। यह खर्च फर्जी मजदूर, फर्जी सामग्री, फर्जी ठेका, फर्जी प्रोजेक्टस, फर्जी लेनदेन आदि के नाम पर खर्च दिखाया गया और आमदनी कम दिखाई गई। इसी प्रकार स्कूल के शुल्क को भी आधा-अधूरा दिखाया। आय-व्यय की बुक में भी बहुत सारी गड़बड़ीयां मिली थी ।

सूत्रों से खबर है कि इस रेड में कुम्भ मेला हरिद्वार 2021 में उच्चाधिकारी रहे करीबी रिश्तेदारी की छानबीन भी आयकर विभाग द्वारा की जा रही है । छापेमारी में पाए गए दस्तावेजों की कई कड़ियों को जोड़ने में लगे हुए हैं आयकर अधिकारी ।

बता दें की कुम्भ मेला शुरुवात से ही विवादों में घिरा हुआ रहा है । वह कुंभ के नोटिफिकेशन में देरी हो, या पूरे कुंभ कार्यों के निष्पादन में बरती गई हिला हवाली या आनन फानन में मनमर्जी से बांटे गए काम । मेला प्रशासन पर यह भी आरोप लगता रहा है कि जानबूझ कर कुम्भ कार्यों में कोताही बरती गई ताकि अंत समय में बिना टेंडर के कार्य आवंटन करने के, ज्यादा वित्तीय अधिकार प्राप्त किये जा सके । कुम्भ मेले की आधी अधूरी तैयारियों को लेकर हुए विवाद के कारण ही बैरागी आखाडों ने अपने आप को अखाडा परिषद से अलग कर लिया था ।

उसी दौरान यह भी देखा गया कि आधी अधूरी तैयारियों एवम कुम्भ कार्यों में बरती गई अनियमितता को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा कई बार फटकार भी लगाई गई थी । वहीं संसाधन विहीन बोगस कंपनी को मनमाने तरीके आरटीपीसीआर जांच का काम सौंपे जाने और फर्जी आरटीपीसीआर नेगेटिव/पॉजिटिव घोटाले के सामने आने के बाद ICMR के हस्तक्षेप के बाद घोटाले की SIT जाँच बिठाई गयी है । जिसकी जांच अभी भी जारी है, ऐसे में जाँच का दायरा और भी विस्तृत हो जाता है ।

सूत्रों की माने तो कई टेंडर ऐसे भी किये गए जो काम कभी धरातल पर हुए ही नहीं, जिसमे यात्रियों के आवागमन के लिए दर्शाये गए बैटरी रिक्शा का संचालन भी है । इसके इलावा भी कई ब्लैक लिस्टड फर्मों को भी कार्य आवंटन किये जाने की सूचना है ।

हाल में ही मिली है, उच्चाधिकारियो को महत्वपूर्ण विभागो की जिम्मेदारी ।

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