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बिना जमीन के ही बना दी डंपिंग जोन की साढ़े आठ लाख की डीपीआर

60 प्रतिशत हो चुका डीपीआर का पेमेंट

हरिद्वार।
बिना भूमि आवंटन के ही लाखों रुपए खर्च कर डीपीआर बना डाली, जबकि जिला प्रशासन ने डंपिंग जोन के लिए दिए जाने वाली भूमि पर भी अनिश्चितता नहीं जताई।
मामला शिवलिकनगर नगर पालिका का है। शिवालिक नगर नगर पालिका बोर्ड अस्तित्व में आने के बाद से ही विवादों में घिरा रहा है। पहले घरों से कूडा उठाना फिर मनमाने रेट लेना और अब कूडा निस्तारण के लिए भूमि आवंटन ना होना विवाद का मुद्दा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि बीते वित्त वर्ष में शिवालिक नगर पालिका के द्वारा जिला प्रशासन से भूमि आवंटन की मांग की गई थी। जिसमें जिलाधिकारी ने बैठक कर कई स्टाल आफर डंपिंग जोन बनाने के लिए चर्चा की थी, परंतु किसी भी स्थल के लिए कोई भी स्वीकृति नहीं हुई। बावजूद इसके शिवालिक नगर पालिका द्वारा लाखों रुपए खर्च कर बिना अधिग्रहण के यही डीपीआर बनवा डाली। सूत्रों की मानें तो यह डीपीआर में करीब साडे आठ लाख की है। जिसमें 60 प्रतिशत धन दिया जा चुका है। बाकी 40 प्रतिशत सभी कार्य पूरे होने के बाद दिया जाना था, परंतु मुद्दा यह है कि सूत ना कपास और जुलाहा लट्ठम लट्ठा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। बिना भूमि अधिग्रहण के ही शिवालिक नगर पालिका द्वारा एक भूमि का डीपीआर तैयार करा दिया गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब नगर पालिका के नए अधिशासी अधिकारी चंशेखर शर्मा ने डंपिंग जोन के लिए भूमि आवंटन को होने वाली जिला प्रशासन की बैठक से 1 दिन पूर्व अपने कार्यालय में अधीनस्थों के साथ इस मामले को लेकर चर्चा की। इस संबंध में जब उनसे जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने बीते सप्ताह ही नगर पालिका शिवालिक नगर का कार्यभार संभाला है। सभी चीजों को समझने के लिए थोडा समय चाहिए। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की बैठक के बाद वह पूरे नगर पालिका क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति को समझने का प्रयास करेंगे उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।

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