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नशेडियों को पकड कर इतिश्री कर रही पुलिस, माफि या ले रहे मौज

हरिद्वार।
ज्वालापुर कोतवाली पुलिस लगातार दो दिन से बाकायदा ठेकों से शराब लेकर पीकर घूमने वाले नशेडियों को पकडकर अपने रजिस्टर में एंट्रियां भरपूर कर रही है। परंतु ज्वालापुर के अत्यधिक क्षेत्रों में बिकने वाली अवैध शराब, गांजा, चरस, स्मैक माफियाआें पर पुलिस की कोई पकड नहीं है। कोतवाली के सामने जटवाड पुल से लेकर और पुराना रानीपुर मोड तक ऐसा कोई गली मोहल्ला नहीं जहां अवैध शराब, चरस, गांजा, स्मैक की कारोबारी ना होती हो। अवैध नशा खोरी के यह माफिया दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की करने में लगे हैं। परंतु पुलिस को इसकी या तो जानकारी नहीं है या फिर जान—बूझकर पुलिस इन अवैध माफियाआें पर शिकंजा कसना नहीं चाहती है, या जिन पुलिस कर्मियों को इसकी जानकारी है भी वे हथेली की खाच के मुताबिक गर्मी मिलने के कारण माफियाआें के खबरची की भूमिका निभा रहे हैं। जिस कारण असली नशे के कारोबारी पुलिस की पकड़ में आ ही नही पाते हैं। इसका सीधा सा उदाहरण बीते दिनों ऊंचे पुल के निकट एक आश्रम में रह रहे गुरुकुल के छात्रों पर अवैध नशे का धंधा करने वाले माफियाआें के द्वारा किया गया हमला था। इनके हौसले इतने बुलंद हैं कि वह पुलिस प्रशासन से डरने के बजाय उल्टा नशाखोरी का विरोध करने वालों को पुलिस की धमकियां दे रहे हैं। ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के पुराना रानीपुर मोड पर तो आलम यह है कि शहर तो शहर बाहर से आने वाले यात्रियों को भी मालूम है कि पुराना रानीपुर मोड$ पर अवैध रूप से शराब आसानी से मिल जाती है। यही नहीं इस क्षेत्र में कुछ महिलाएं भी बाकायदा नशे के सामान की होम डिलीवरी तक करती हैं। कई बार मौके पर तैनात पुलिसकर्मी भी उन्हें अनदेखा करते हैं। उल्लेखनीय है कि नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जिस दिन अपना पदभार धर्म नगरी में संभाला था उनका पहला बयान नशाखोरी और माफियाआें पर शिकंजा कसना था। बावजूद इसके चंद पुलिस कर्मिंयों की कारगुजारियों के कारण माफिया फल फूल रहे हैं , मौज ले रहे हैं।

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