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15+ साल की नाबालिग पत्नी से सेक्स रेप नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज मोहम्मद असलम का फैसला, अली को मिली जमानत

प्रयागराज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार 6 अगस्त  को अप्राकृतिक सेक्स और दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग ‘पत्नी’ के साथ यौन संबंध को ‘बलात्कार’ नहीं माना जाएगा। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपित खुशाबे अली को जमानत दे दी।

दरअसल, नाबालिग लड़की ने अपने वयस्क पति खुशाबे अली के खिलाफ दहेज, मारपीट, आपराधिक धमकी और जबरन यौन संबंध बनाने के आरोप में मुरादाबाद के भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के आरोपित पति की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद असलम ने यह फैसला सुनाया।

जस्टिस असलम ने 2013 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 (बलात्कार के लिए सजा) में संशोधन जिक्र किया। जज ने कहा कि धारा 375 में लिखा है, “किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया, जिसमें पत्नी पंद्रह वर्ष से कम उम्र की न हो, बलात्कार नहीं है।” मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पति के वकील ने दावा किया कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अली और उसके भाइयों द्वारा उसका यौन शोषण करने के आरोपों को नकार दिया था। इसके बाद जस्टिस मोहम्मद असलम ने आरोपित को जमानत दे दी।

वहीं कानून के जानकारों को कहना है जहां संविधान की कोई धारा दूसरी धारा का अतिक्रमण कर रही हो तो संविधान कि मूल परिकल्पना के मद्देनजर फैसला देना चाहिए । भारत के संविधान में 18 वर्ष कि आयु से कम किसी भी व्यक्ति के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध है उपरोक्त घटना पोक्सो अधिनियम के अंदर आती है । वही ट्रिपल तलाक वह मुस्लिम महिला अधिकारों के लिए बात करने वाले हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि दोनों ही पक्ष एक समुदाय विशेष से संबंध रखते हैं इसलिए यह उनका निजी मामला है हालांकि भारत एक देश एक विधान एक जैसा ही हो संविधान की भावना होनी चाहिए ।

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